झांसी में अब अवैध अस्पतालों और नियमों की अनदेखी करने वाले नर्सिंग होम्स पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। शुक्रवार देर रात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वीरांगना नगर स्थित *सांवरिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर* पर छापेमारी की। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन पंजीकरण, फायर एनओसी समेत कई जरूरी दस्तावेज मौके पर नहीं दिखा सका। इसके बाद विभाग ने नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
आइए जानते हैं पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर झांसी जिले में पंजीकृत और अपंजीकृत निजी अस्पतालों, ट्रॉमा सेंटर और नर्सिंग होम्स की सघन जांच की जा रही है। इसी अभियान के तहत शुक्रवार रात करीब 10 बजे शिकायत मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिशिर पुरी और डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष अग्निहोत्री अपनी टीम के साथ वीरांगना नगर स्थित सांवरिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल पहुंचे। जांच शुरू होते ही अस्पताल प्रबंधन से पंजीकरण, फायर एनओसी और अन्य वैधानिक दस्तावेज मांगे गए, लेकिन अस्पताल संचालक मौके पर आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को लेकर भी कई कमियां सामने आईं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल संचालक को नोटिस जारी करते हुए सोमवार तक सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित समय तक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पंजीकरण निरस्त करने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। उधर मेडिकल कॉलेज के पास एक ही भवन में संचालित तीन अस्पताल—गांधी हॉस्पिटल, चिराग हॉस्पिटल और झांसी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल—भी स्वास्थ्य विभाग की रडार पर हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इन अस्पतालों के अवैध संचालन के आरोप लगाए गए थे। शिकायत मिलने के बाद तीनों अस्पतालों के संचालकों को शनिवार को आवश्यक दस्तावेजों के साथ कार्यालय में उपस्थित होने का नोटिस दिया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि नोटिस मिलने के बावजूद तीनों अस्पतालों का कोई भी संचालक स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय नहीं पहुंचा। डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष अग्निहोत्री के मुताबिक नोटिस का जवाब न देने वाले अस्पताल संचालकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में जांच अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सोमवार तक संबंधित अस्पताल आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर पाएंगे, या फिर स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करेगा?
इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या झांसी में निजी अस्पतालों की ऐसी जांच लगातार होनी चाहिए?अगर आप झांसी और बुंदेलखंड की हर बड़ी और सटीक खबर सबसे पहले देखना चाहते हैं, तो The News Tantra से जुड़ जाएं




