ललितपुर में रिटायर्ड शिक्षक की आत्महत्या से मचा बवाल: परिजनों ने अंतिम संस्कार से किया इनकार, रिटायर्ड डीजी समेत सात लोगों पर एफआईआर की मांग
ललितपुर। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम गोस्वामी की आत्महत्या के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार करने से इनकार करते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। परिजनों का कहना है कि जब तक उनकी शिकायत पर रिटायर्ड डीजी सहित सात नामजद लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
सुबह करीब 10 बजे मृतक के परिजन, रिश्तेदार, ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसपी से मुलाकात कर पूरे मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक परिजन और उनके समर्थक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में डटे रहे और अधिकारियों के साथ वार्ता जारी थी।
100 से अधिक लोग पहुंचे एसपी कार्यालय
मृतक के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग एसपी कार्यालय पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्यमंत्री मनोहर लाल के पुत्र चंद्रशेखर पंथ, भाजपा नेता निखिल तिवारी, गंधर्व सिंह लोधी तथा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अजय पटेरिया कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
परिजनों का कहना है कि यदि मृतक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

गुरुवार को जहरीला पदार्थ खाकर दी थी जान
राजाराम गोस्वामी ने गुरुवार को जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने कथित रूप से तीन सुसाइड नोट लिखे थे। मृतक के पुत्र अनुराग गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता ने ये सुसाइड नोट उन्हें सौंपते हुए कहा था कि इन्हें उनकी मृत्यु के बाद पुलिस को दे दिया जाए।
अनुराग के अनुसार, उनके पिता पिछले कई वर्षों से मानसिक रूप से परेशान थे और उनका कहना था कि वर्ष 2002 में दर्ज एक मामले ने उनका पूरा जीवन बर्बाद कर दिया।
सुसाइड नोट में 24 साल पुराने मामले का जिक्र
कथित सुसाइड नोट में राजाराम गोस्वामी ने लिखा है कि 5 जुलाई 2002 उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था। उनके अनुसार उस समय ललितपुर में तैनात तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एलवी एन्टॉनी देव कुमार के कार्यकाल में उनके साथ अन्याय हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि दो पुलिसकर्मी उन्हें विद्यालय से पुलिस अधीक्षक के पास लेकर गए, जहां उनसे उनकी जाति पूछी गई। उन्होंने लिखा कि इसके बाद उनके साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की गई और उन्हें अपमानित किया गया।
राजाराम गोस्वामी ने यह भी दावा किया कि उसी घटना में गांव के अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया, उनके साथ मारपीट की गई और बाद में जेल भेज दिया गया। उनके अनुसार उन सभी पर अनुसूचित जाति के लोगों के साथ भेदभाव, जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए थे, जबकि उन्होंने अपने नोट में इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया।

“झूठे मुकदमे ने जिंदगी बर्बाद कर दी”
सुसाइड नोट में राजाराम गोस्वामी ने लिखा कि पिछले 24 वर्षों से वह इसी मुकदमे की वजह से मानसिक, सामाजिक और आर्थिक पीड़ा झेल रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इस मामले ने उनका सम्मान, पारिवारिक जीवन और मानसिक शांति छीन ली।
उन्होंने लिखा कि अब उनके पास जीने का कोई कारण नहीं बचा और इसी कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाने का फैसला किया।
सात लोगों को ठहराया जिम्मेदार
अपने कथित सुसाइड नोट में राजाराम गोस्वामी ने अपनी मौत के लिए रिटायर्ड डीजी एलवी एन्टॉनी देव कुमार समेत कुल सात लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। नोट में उन्होंने कुछ स्थानीय लोगों और कथित गवाहों के नाम भी लिखे हैं और आरोप लगाया है कि इन लोगों ने उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाकर उनका जीवन बर्बाद कर दिया।
इसी आधार पर परिजन इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
अंतिम संस्कार से किया इनकार
परिजनों ने साफ कर दिया है कि जब तक पुलिस नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करती, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यदि बिना कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर दिया गया तो उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कम हो जाएगी।
पुलिस की भूमिका पर नजर
फिलहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में परिजनों और अधिकारियों के बीच वार्ता जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।




