हमीरपुर- टूटी झोपड़ी और सांप-बिच्छुओं के खौफ में जीने को मजबूर ग्रामीण सालों बाद भी नहीं मिला ‘प्रधानमंत्री आवास’

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हमीरपुर- टूटी झोपड़ी और सांप-बिच्छुओं के खौफ में जीने को मजबूर ग्रामीण सालों बाद भी नहीं मिला ‘प्रधानमंत्री आवास’

हमीरपुर टूटी झोपड़ी और सांप-बिच्छुओं के खौफ में जीने को मजबूर ग्रामीण, सालों बाद भी नहीं मिला ‘प्रधानमंत्री आवास’ सरीला ब्लॉक के हरसुंडी डेरा में बदहाली की दास्तान अपात्रों को मिले पक्के मकान असली हकदार आज भी टपकती छतों के नीचे गुजार रहे रातें

हमीरपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ का लाभ धरातल पर कैसे दम तोड़ रहा है, इसकी बानगी उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में देखने को मिल रही है। जिले के सरीला ब्लॉक अंतर्गत हरसुंडी डेरा गांव के कई परिवार आज भी टूटी-फूटी झोपड़ियों और जर्जर कच्चे मकानों में जान हथेली पर रखकर रहने को विवश हैं।
बरसात में टपकती छतें और जहरीले जीवों का डेरा

ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के मौसम में स्थिति बद से बदतर हो जाती है। टपकती छतों, दरकती कच्ची दीवारों और सीलन भरे कमरों में रोजाना सांप-बिच्छू और जहरीले कीड़े निकलते हैं। खौफ का आलम यह है कि रात के वक्त परिजनों को अपने मासूम बच्चों को सुलाने तक में डर लगता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। पूरा घर बारिश में कीचड़ और पानी से भर जाता है। सालों से लगा रहे चक्कर,आज तक नहीं मिली एक ईंट स्थानीय पीड़ित निवासी जगत और प्रेम ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया    

हम कई वर्षों से आवास पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। ग्राम प्रधान और सचिव से लेकर ब्लॉक कार्यालय तक दर्जनों बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है कि अगली सूची में नाम आ जाएगा। आज तक हमें मदद के नाम पर एक ईंट तक नसीब नहीं हुई। अपात्रों पर मेहरबानी, पात्रों के नाम सूची से गायब ग्रामीणों ने स्थानीय पंचायत व ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर घोर लापरवाही और मिलीभगत का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है
सर्वे में धांधली सर्वे करने वाले अधिकारी मौके पर आए बिना ही कागजों पर पात्रता तय कर देते हैं। अपात्रों को मिला लाभ जिनके पास पहले से पक्के मकान और साधन हैं उन्हें आवास योजना का लाभ दे दिया गया।हकदारों की अनदेखी जो लोग सच में झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं, उनके नाम सूची से काट दिए गए।

तस्वीरें बयां कर रहीं प्रशासनिक उदासीनता

गांव के जर्जर कच्चे मकानों में पड़ी बड़ी-बड़ी दरारें और टूटे छप्पर जमीनी हकीकत खुद बयां कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अपात्रों पर कार्रवाई करते हुए असली जरूरतमंदों को अविलंब प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मुहैया कराया जाए।